हमारी थाली और उसका महत्व
रोटी, चावल, दाल, ताज़ी सब्ज़ी और मौसमी फल भारतीय घरों का आधार हैं। समस्या अक्सर भोजन के प्रकार में नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली में होती है।
सुपरमार्केट के पैकेट बंद (processed) स्नैक्स की तुलना में, घर का खाना (home cooked food) हमें स्थिर और लंबी ऊर्जा देता है। शाम को ऑफिस में 5 बजे की चाय के साथ हम क्या खाते हैं, यह तय करता है कि रात के खाने तक हमें कैसा महसूस होगा।
संतुलन बनाए रखने के तरीके
भोजन का समय अधिक नियमित रखना
हमारा शरीर एक आंतरिक घड़ी के अनुसार काम करता है। रोज़ाना लगभग एक ही समय पर भोजन करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और ऊर्जा का स्तर पूरे दिन समान रहता है।
पानी पीना
कई बार जब हमें लगता है कि हम थके हुए हैं या हमें भूख लग रही है, तो असल में शरीर सिर्फ पानी मांग रहा होता है। दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी पीने की आदत बहुत प्रभावी है।
धीरे खाना
टीवी या मोबाइल देखते हुए खाने से हम अक्सर ज़रूरत से ज़्यादा या बहुत तेज़ी से खा लेते हैं। भोजन को चबाने में समय लगाने से पेट को तृप्ति का संकेत जल्दी मिलता है।
घर का खाना अधिक चुनना
रेस्टोरेंट के भारी भोजन की तुलना में घर की सादी दाल और रोटी शरीर के लिए बहुत हल्की होती है। इससे खाने के तुरंत बाद आने वाली सुस्ती कम होती है。